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LPG की किल्लत से फिर से रसोई में दिखेगा कोयला और केरोसिन! सरकार ने दिए ये संकेत

lpg cylinder

पश्चिम एशिया में गहराते सैन्य संघर्ष और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी ने वैश्विक तेल और गैस बाजार में अब तक की सबसे बड़ी आपूर्ति बाधा उत्पन्न कर दी है। ईरान और इजराइल-अमेरिका के बीच जारी जवाबी सैन्य कार्रवाइयों के कारण ऊर्जा व्यापार का यह प्रमुख मार्ग लगभग ठप हो गया है, जिससे भारत सहित दुनिया भर के देशों में ईंधन संकट गहरा गया है।

होर्मुज की नाकेबंदी और वैश्विक प्रभाव

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाला तेल का प्रवाह 90% से अधिक कम हो गया है। इस संघर्ष की वजह से वैश्विक तेल आपूर्ति में प्रतिदिन 8 मिलियन बैरल की भारी कटौती होने की आशंका है। बाजार को स्थिरता देने के लिए आपातकालीन भंडार से 400 मिलियन बैरल तेल जारी करने का अभूतपूर्व निर्णय लिया गया है, लेकिन मांग के मुकाबले यह आपूर्ति नाकाफी साबित हो रही है।

भारत की LPG चिंता: 90% आयात संकट में

भारत अपनी वार्षिक 31-32 मिलियन टन LPG जरूरत का लगभग 60-65% हिस्सा आयात करता है। इस आयात का 90% हिस्सा सऊदी अरब, कतर और यूएई जैसे पश्चिम एशियाई देशों से आता है। होर्मुज में जारी संकट के कारण आपूर्ति बाधित हुई है, जिसके परिणामस्वरूप:

कमर्शियल सप्लाई में कटौती : सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं (रसोई गैस) को प्राथमिकता देते हुए होटलों और रेस्तरां की आपूर्ति को सीमित कर दिया है। कमर्शियल ग्राहकों को अब उनकी औसत खपत का केवल 20% हिस्सा आवंटित किया जा रहा है।

घबराहट में खरीदारी: देश में रसोई गैस की दैनिक बुकिंग 6 मिलियन से बढ़कर 8 मिलियन सिलेंडर तक पहुंच गई है, हालांकि वास्तविक डिलीवरी अभी 5.5 मिलियन सिलेंडरों तक ही सीमित है।

कालाबाजारी रोकने के लिए डिजिटल सख्ती

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट किया कि कमर्शियल सप्लाई पर नियंत्रण कालाबाजारी को रोकने के लिए लगाया गया है। सरकार अब डिजिटल ऑथेंटिकेशन कोड सिस्टम का विस्तार कर रही है ताकि 90% उपयोगकर्ताओं को इसके दायरे में लाकर गैस के अवैध डायवर्जन को रोका जा सके।

LPG सप्लाई के लिए वैकल्पिक व्यवस्था

सरकार ने आश्वासन दिया है कि देश में बिजली और गैस की आपूर्ति सुरक्षित है। LPG आयात में आई कमी की भरपाई अन्य स्रोतों से की जा रही है।

पर्यावरण मंत्रालय ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को सलाह दी है कि हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को अस्थायी रूप से कोयला, बायोमास जैसे वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल की अनुमति दी जा सकती है।

सरकार का कहना है कि देश के पास पर्याप्त उत्पादन और सप्लाई प्रबंधन है, जिससे लंबे समय तक चलने वाले किसी भी संघर्ष की स्थिति में भी ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखी जा सके।

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