कनाडा में पंजाबी लेडी रेडियो होस्ट को साढ़े 5 साल की सजा, 83 करोड़ की ड्रग के साथ हुई थी गिरफ्तार
कनाडा में रहने वाली पंजाबी मूल की रेडियो होस्ट सुखविंदर कौर संघा को नशा तस्करी के मामले में ब्रिटिश कोलंबिया की सुप्रीम कोर्ट ने साढ़े 5 साल की सजा सुनाई है। पुलिस ने उन्हें करीब 83 करोड़ रुपये मूल्य की मेथामफेटामाइन के साथ गिरफ्तार किया था।
अदालत में संघा ने खुद को निर्दोष बताते हुए तस्करी में शामिल होने से इनकार किया, लेकिन जांच के दौरान मिले मोबाइल टेक्स्ट मैसेज ने उनकी भूमिका उजागर कर दी। कोर्ट ने पाया कि वह न केवल इस रैकेट में अपनी मर्जी से शामिल थीं, बल्कि गिरोह की एक भरोसेमंद सदस्य के रूप में सक्रिय भूमिका निभा रही थीं।
47 वर्षीय संघा का संबंध पंजाब के जालंधर जिले के नकोदर से बताया जाता है, जबकि उनका जन्म कनाडा के प्रिंस जॉर्ज में हुआ था। पिछले एक दशक में उन्होंने पंजाबी रेडियो और टीवी इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाई थी। उनके कार्यक्रमों में अक्सर नामी राजनेता, पुलिस अधिकारी और मशहूर हस्तियां शिरकत करती थीं।
फिल्मी अंदाज में हुई गिरफ्तारी
अक्टूबर 2021 में संघा फ्लोरिडा नंबर प्लेट वाली एक किराए की कार में अमेरिका से कनाडा में प्रवेश कर रही थीं। सरे (ब्रिटिश कोलंबिया) स्थित बॉर्डर चेकपोस्ट पर जब अधिकारियों ने उन्हें सेकेंडरी जांच के लिए रोका, तो उन्होंने कार भगा ली।
पुलिस ने पीछा कर उन्हें सरे की 16वीं एवेन्यू पर गिरफ्तार कर लिया। कार की तलाशी में 4 डफल बैग से 108 किलोग्राम मेथामफेटामाइन बरामद हुई, जिसकी बाजार कीमत करीब 83 करोड़ रुपये आंकी गई।
कोर्ट में दलीलें खारिज
सुनवाई के दौरान संघा ने दावा किया कि वह वाशिंगटन में अपनी मौसी के अंतिम संस्कार में शामिल होने गई थीं और उन्हें धमकाकर इस काम के लिए मजबूर किया गया। हालांकि जस्टिस जॉन गिब-कार्सले ने इन दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया।
अदालत ने कहा कि मोबाइल चैट से साफ है कि संघा पहले भी ऐसी तस्करी में शामिल रही हैं और उनकी बातचीत कहीं से भी दबाव में होने का संकेत नहीं देती।
समाज पर असर का जिक्र
न्यू वेस्टमिंस्टर की अदालत ने सजा सुनाते हुए कहा कि नशीले पदार्थों की तस्करी केवल एक अपराध नहीं, बल्कि समाज के लिए गंभीर खतरा है। कोर्ट ने उम्मीद जताई कि संघा जेल में अपने समय का उपयोग आत्मचिंतन के लिए करेंगी। अपने कार्यक्रमों में अपराध के खिलाफ आवाज उठाने वाली संघा का खुद इस तरह के गंभीर अपराध में दोषी पाया जाना कनाडा के पंजाबी समुदाय के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।



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