Loading Now

‘तुरंत करो बहस, नहीं तो दुनिया हो जाएगी तबाह’…, ईरानी हमलों से घबराए खाड़ी देश, आनन-फानन में पहुंचे UN

मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब गंभीर रूप लेता नजर आ रहा है। क्षेत्र में बढ़ते हमलों और जवाबी कार्रवाइयों के बीच हालात बेहद संवेदनशील हो गए हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय शांति पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

खाड़ी देशों की यूएन में गुहार
कई खाड़ी देशों ने United Nations और उसके मानवाधिकार परिषद से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। जिनेवा में परिषद के समक्ष प्रस्तुत एक राजनयिक नोट में बहरीन, जॉर्डन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने क्षेत्र में नागरिकों और ऊर्जा ढांचे पर बढ़ते हमलों को गंभीर चिंता का विषय बताया है। इन देशों का कहना है कि बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन हमलों से न सिर्फ सुरक्षा खतरे में है, बल्कि मानवाधिकारों पर भी गहरा असर पड़ रहा है।

ऊर्जा ठिकानों पर हमले, बढ़ा वैश्विक खतरा
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान द्वारा खाड़ी क्षेत्र में तेल और गैस से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाए जाने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। खासकर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के संभावित बंद होने की आशंका ने वैश्विक आपूर्ति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह जलमार्ग बाधित होता है, तो दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिससे महंगाई में उछाल आ सकता है।

तेल और गैस की कीमतों में तेज उछाल
तनाव बढ़ने के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो पहले 73 डॉलर से कम थी। इसके अलावा प्राकृतिक गैस की कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी देखी गई है। कतर की एक प्रमुख गैस सुविधा और कुवैत की रिफाइनरियों पर हमलों के बाद यह आशंका और गहरा गई है कि ऊर्जा संकट लंबा खिंच सकता है।

तत्काल कार्रवाई की मांग
खाड़ी देशों द्वारा प्रस्तावित मसौदा प्रस्ताव में इन हमलों की कड़ी निंदा की गई है और ईरान से नागरिक ढांचे व वाणिज्यिक जहाजों पर हमले तुरंत रोकने की मांग की गई है। साथ ही, हुए नुकसान के लिए मुआवजे की भी बात उठाई गई है। संयुक्त राष्ट्र अब इस मुद्दे पर आपात बहस आयोजित करने की तारीख तय करने पर विचार कर रहा है।

वैश्विक असर की आशंका
विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो इसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया में आर्थिक अस्थिरता और महंगाई बढ़ सकती है।

Previous post

हलाला से मुस्लिम महिलाओं को मिलेगी आजादी; भाजपा शासित राज्य में बड़ा कदम, लगेगा जुर्माना और होगी जेल

Next post

नहीं तो मारकर ‘नीले ड्रम’ में डाल दूंगी! सहमे पति ने अपनी पत्नी को किया आशिक के हवाले

Post Comment

खेल / मनोरंजन / लाइफस्टाइल